विषय सूची
- नाम का अर्थ
- इस सेवा की उपयोगिता
- पर्यावरण-अनुकूल अग्नि सुरक्षा
- ढांचागत सुरक्षा (Structural Safety)
- फायर सेफ्टी सिस्टम का डिज़ाइन और इंस्टॉलेशन
- अग्नि सुरक्षा उपकरण
- स्मोक एग्ज़ॉस्ट सिस्टम
- आग के धुएँ में मौजूद ज़हरीली गैसें
- स्मोक एक्सट्रैक्शन / स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम
- अग्नि सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण
- अग्नि सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल
- कानूनी अनुपालन में सहयोग (उत्तर प्रदेश)
- संपर्क एवं परामर्श
नाम का अर्थ
- हरित (Green) — पर्यावरण के अनुकूल
- आग बुझाने या सुरक्षा के लिए जो भी तकनीक या रसायन उपयोग किया जाए, उसमें पर्यावरण तथा मनुष्यों और अन्य प्राणियों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का ध्यान रखा जाता है।
- अग्नि अभियांत्रिकी (Fire Engineering)
- विज्ञान की वह शाखा जो भवनों के निर्माण के समय उनकी बनावट का अध्ययन करती है, ताकि वे आग से अधिक सुरक्षित हों। इसमें सुरक्षित जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए अग्नि सुरक्षा के मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- सेफ्टी प्रोटेक्शन सेवाएँ (अग्नि सुरक्षा संरक्षण सेवाएँ)
- आग से होने वाली आपदा के जोखिम को कम करने के सभी उपायों का उपयोग करते हुए मानव जीवन, प्राणियों के जीवन और संपत्ति की रक्षा के लिए दी जाने वाली सुविधाएँ।
इस सेवा की उपयोगिता
आज के समय में उद्योगों, कार्यालयों, बाज़ारों, स्कूल-कॉलेजों, अस्पतालों, होटलों, बहुमंज़िला आवासीय भवनों, शोरूम और शॉपिंग सेंटर जैसे भवनों में आग का जोखिम बहुत अधिक है। इसलिए इन भवनों के लिए इस प्रकार की सेवाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई हैं।
पर्यावरण-अनुकूल अग्नि सुरक्षा
पारंपरिक अग्निशामक यंत्रों में कई बार हैलोन-1211 (ब्रोमोक्लोरोडाइफ्लोरोमीथेन) जैसे रसायनों का उपयोग होता रहा है, जो ओज़ोन परत को नुकसान पहुँचाते हैं। हरित सेवाओं में ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता दी जाती है जो आग बुझाने में प्रभावी हों और प्रकृति पर कम से कम दुष्प्रभाव डालें।
ध्यान रहे: हर पारंपरिक अग्निशामक यंत्र हानिकारक नहीं होता, और 'हरित' कहे जाने वाले हर उत्पाद की पर्यावरण-सुरक्षा की जाँच की जानी चाहिए। विकल्प का चयन खतरे के प्रकार, लोगों की सुरक्षा और लागू मानकों के अनुसार किया जाता है।
ढांचागत सुरक्षा (Structural Safety)
भवन का निर्माण शुरू करने से पहले प्रस्तावित भवन का नक्शा अग्नि सुरक्षा की दृष्टि से तैयार कराया जाना चाहिए, और निर्माण में ढांचागत सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। भवन ऐसा बनना चाहिए जो आग के प्रति सक्षम (Fire Efficient) हो और उचित मानकों के अनुरूप हो।
भवन के ढांचे में इन बातों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है:
- बीम, कॉलम, लिंटर, मोटाई, फ़र्श, छत और भार सहने वाली दीवारें
- कमरों के विभाजन के समय गलियारे (कॉरिडोर) और दरवाज़े
- बाहरी सीढ़ियाँ और फायर एस्केप
- यात्रा दूरी (ट्रैवलिंग डिस्टेंस) और पलायन मार्ग
- लोहे के ढांचे को उचित मानक के अनुसार सीमेंट, बालू और गिट्टी के मिश्रण से ढकना तथा अग्निरोधक सामग्री का उपयोग
फायर सेफ्टी सिस्टम का डिज़ाइन और इंस्टॉलेशन
आधुनिक बहुमंज़िला और कम ऊँचाई वाले भवनों में उनके उपयोग (Occupancy) के अनुसार चेतावनी प्रणालियाँ लगाई जाती हैं, ताकि आग लगते ही तुरंत पता चल सके और आग के फैलाव को रोकते हुए अग्निशमन कार्य किया जा सके। इनमें शामिल हैं:
- हाथ से चलने वाला इलेक्ट्रिक फायर अलार्म सिस्टम
- स्वचालित स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म सिस्टम
- स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम
अग्नि सुरक्षा उपकरण
राष्ट्रीय भवन संहिता (2005/2016 संस्करण संदर्भ के रूप में प्रायः उल्लिखित) के अनुसार भवन के क्षेत्रफल, ऊँचाई और उपयोग को देखते हुए उपयुक्त अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाए जाते हैं। लागू संस्करण और स्थानीय नियमों की पुष्टि प्रत्येक भवन के लिए अलग से की जानी चाहिए।
भारतीय मानक ब्यूरो के आई.एस. 2190 (IS 2190) के अनुरूप विभिन्न प्रकार के पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र (प्रारंभिक अग्निशामक उपकरण) पहुँच और आग के जोखिम के आधार पर रखे जाते हैं। इसके अतिरिक्त, भवन की आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित इंजीनियरों द्वारा ये व्यवस्थाएँ लगाई जाती हैं:
- फर्स्ट-एड होज़ रील सिस्टम
- डाउनकमर सिस्टम
- वेट राइज़र सिस्टम
- यार्ड हाइड्रेंट सिस्टम
- टेरेस टैंक और टेरेस पंप
- भूमिगत फायर वॉटर टैंक तथा उनके पास डीज़ल फायर पंप, इलेक्ट्रिक फायर पंप और जॉकी पंप
- पी.ए. (P.A.) सिस्टम और सुरक्षा साइनेज
स्मोक एग्ज़ॉस्ट सिस्टम
इसका मुख्य काम धुएँ के फैलाव को रोकते हुए भवनों और बंद जगहों से धुआँ, ज़हरीली गैसें और गर्मी बाहर निकालना है। प्रायः किसी भवन में आग लगने पर आग से ज़्यादा ख़तरनाक उसका धुआँ होता है, जिससे दम घुटने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। यह प्रणाली दम घुटने से जान जाने के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
यह प्रणाली सामान्यतः इस क्रम में काम करती है:
- धुएँ की पहचान: भवन में धुआँ फैलते ही स्मोक डिटेक्टर सक्रिय हो जाते हैं।
- खिंचाव (सक्शन): लगे हुए एग्ज़ॉस्ट पंखे हवा और धुएँ को तेज़ी से अपनी ओर खींचते हैं।
- बाहर फेंकना: डक्ट या पाइपलाइन के ज़रिये धुआँ इमारत से बाहर खुले आसमान में छोड़ दिया जाता है।
- ताज़ी हवा का प्रवेश: जहाँ डिज़ाइन में ऐसी व्यवस्था हो, वहाँ धुआँ निकलने के साथ ताज़ी हवा आने का रास्ता भी बनता है, जो धुएँ में फँसे लोगों तक शुद्ध हवा पहुँचाने में सहायक होता है।
आग के धुएँ में मौजूद ज़हरीली गैसें
धुएँ की संरचना इस बात पर निर्भर करती है कि क्या जल रहा है। नीचे दी गई गैसें जानलेवा हो सकती हैं। यह शैक्षणिक जानकारी है, पूर्ण विष-विज्ञान संदर्भ नहीं।
- कार्बन मोनो ऑक्साइड (CO)
- रंगहीन और गंधहीन खतरनाक गैस। साँस के साथ शरीर में जाने पर यह ऑक्सीजन की जगह ले लेती है और दम घुटने से जान जा सकती है।
- हाइड्रोजन साइनाइड (HCN)
- प्लास्टिक, रेशम, नायलॉन और ऊन जैसी सामग्री जलने से बनने वाली अत्यंत ज़हरीली गैस। यह शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन का उपयोग करने से रोकती है।
- कार्बन डाईऑक्साइड (CO2)
- आग में बड़ी मात्रा में निकलती है। यह सीधे ज़हरीली नहीं है, पर हवा में इसकी मात्रा बढ़ने से ऑक्सीजन घटती है और दम घुटने लगता है।
- नाइट्रोजन ऑक्साइड्स (NOx)
- कुछ रसायन या विशेष प्रकार के सिंथेटिक कपड़े जलने पर बनती है और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुँचाती है।
- सल्फर डाईऑक्साइड (SO2)
- रबर या कुछ प्रकार के प्लास्टिक जलने से निकलने वाली तीखी गंध की गैस, जिससे आँखों, नाक और गले में तेज़ जलन होती है।
- एक्रोलिन और फॉर्मेल्डिहाइड
- लकड़ी, कागज़ और कपड़े जलने से बनने वाले धुएँ में पाए जाते हैं और श्वसन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
स्मोक एक्सट्रैक्शन / स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम
यह एक अग्नि सुरक्षा व्यवस्था है, जिसे बड़ी इमारतों, बहुमंज़िला भवनों, मॉल, मल्टीप्लेक्स, अस्पतालों, होटलों और बहुस्तरीय भूमिगत पार्किंग में आग के दौरान उत्पन्न अत्यधिक तापमान, ज़हरीले धुएँ, गर्म हवा और गैसों को बाहर निकालने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
अग्नि सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण
राष्ट्रीय भवन संहिता के अग्नि एवं जीवन सुरक्षा मानकों के संदर्भ में फैक्ट्री, अस्पताल, होटल, स्कूल-कॉलेज, कार्यालय, बाज़ार, मॉल और मल्टीप्लेक्स जैसे स्थानों का अग्नि सुरक्षा की दृष्टि से निरीक्षण किया जाता है। देखा जाता है कि आग से बचाव के पर्याप्त इंतज़ाम हैं या नहीं, मानकों का पालन हुआ है या नहीं, और जहाँ कमी है वहाँ उसे दूर करने के उपाय सुझाए जाते हैं।
ऑडिट एक सलाह है, प्रमाणपत्र नहीं। यह नियामक अनुपालन स्वतः सिद्ध नहीं करता।
अग्नि सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल
किसी भी संस्थान या प्रतिष्ठान के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को यह सिखाया जाता है कि आग से बचाव के लिए क्या-क्या सावधानियाँ रखें। अचानक आग लगने पर खुद को और दूसरों को सुरक्षित बाहर निकालना, भवन में लगे अग्नि सुरक्षा उपकरणों की जानकारी रखना और जान-माल की रक्षा करना सिखाया जाता है।
सबसे पहले सुरक्षित बाहर निकलें और आपात सेवाओं को सूचित करें। अग्निशामक यंत्र केवल छोटी आग पर, सुरक्षित स्थिति में और प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ही प्रयोग किए जाने चाहिए।
कानूनी अनुपालन में सहयोग (उत्तर प्रदेश)
किसी भवन का उपयोग शुरू करने से पहले अग्नि एवं जीवन सुरक्षा प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा से प्राप्त करने की कार्यवाही में हम सहयोग कर सकते हैं: आवश्यकताओं को समझना, दस्तावेज़ तैयार करना और प्रक्रिया को आगे बढ़ाना।
अनुमोदन, प्रमाणपत्र और अंतिम निर्णय सक्षम सरकारी प्राधिकारी के अधिकार में हैं। हम किसी परिणाम की गारंटी नहीं देते और सरकार की ओर से प्रमाणपत्र जारी नहीं करते। प्रक्रिया, शुल्क और समय-सीमा की पुष्टि संबंधित विभाग से अवश्य करें।
संपर्क एवं परामर्श
अपने भवन, संस्थान या प्रतिष्ठान के लिए अग्नि सुरक्षा मानकों और नियमों की जानकारी पाने और अग्नि सुरक्षा उपकरण स्थापित कराने में सहयोग के लिए परामर्श का अनुरोध करें और अपने भवन के अनुसार सटीक जानकारी प्राप्त करें।
ध्यान दें
यह पृष्ठ सामान्य शैक्षणिक जानकारी है; यह कानूनी या इंजीनियरिंग सलाह नहीं है। राष्ट्रीय भवन संहिता और भारतीय मानकों के किस संस्करण व स्थानीय नियमों के अनुसार आपके भवन पर क्या लागू होता है, इसकी पुष्टि संबंधित प्राधिकारी और योग्य विशेषज्ञ से अवश्य करें।
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आइए, आपके भवन को सुरक्षित बनाएँ।
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